चातक का स्वर सुनने वाले .....बादल वापस मोड़े होंगे ....
हिरनी के द्रग फोड़े होंगे ....तितर के पर नोचे होंगे ....
तस्वीर अधूरी रहनी थी !!!!!!!!!!!!!
तस्वीर अधूरी रहनी थी !!!!!!!!!!!!!
गुजरे हुए वक्त की ...........क्या बात कहे हम........ढक रहे है नम आँखों............. को पल्ले से अपने ..........
अपनी जुबान में यह शब्द ...........कैसे कहे हम ........
एसी हालत में.........तुही बता..........क्या मुलाकात करे हम .......
दिल ने महसूस की.............. जब भी कमी तेरी ..........
चाह तुझे बता दे...........पर खुद में ही सिमटे रहे हम.................



शब्दों के इस जाल से ,एक शब्द निकला है
तुमने हमारी जुबान का हर शब्द संभाला है । ।
हर वक्त याद रहती है मेरे दिल में तुम्हारी
तुमने मुझे जीवन भर इस तरह से पाला है । ।
अनदेखी में भी नज़रंदाज़ न किया तुमने मुझे
हर दुःख से तुमने मुझे इस तरह उबारा है । ।
होती है मन मैं ख़ुशी मेरे तब-तब
जब -जब मैंने होंठो से तेरा नाम पुकारा है । ।
दिल में तेरी तस्वीर को ऐसे पाल रखा है मैंने
जैसे मेरा जीने का एक तुही सहारा है । ।
तन्हाई में आती है तेरी याद चलकर ऐसे
जैसे दुनिया की इस भीड़ में एक तू ही किनारा है । ।
सुबह की पहली किरण से आया तेरा ख्याल ऐसे
जैसे तुझ बिन जिब्दगी में कुछ भी ना मेरा है । ।
चाहूँ के , तू सदा रहे मेरे साथ मेरी परछाई बन कर
और मैं पालू तुझे अपने हिरदय में ऐसे
जैसे तेरे बिन मेरा जीना , एक पल भी न गंवारा है । ।
by : vibha sharma

एक ऐसा परमात्मा का बनाया हुआ 'अस्तितिव'
जिसे न अपनी भूख का ख्याल है न तो प्यास की चिन्ता ,
बस परवाह है तो उन सभी की जिनके लिए सिर्फ वही जीना जानती है ..
और सिसकती है हर पल उन सबका प्यार पाने को ,
जिन लोगो पर वो हँसते -२ अपने जीवन का स्नेह उन्हें सीचने में लगा देती है ..
वक़्त पर सदा सबका काम करती है ,पर
खुद पर एक लम्हा भी न खर्च करती है ..
वो अपना वजूद खोकर किसी की जीवन संगनी बनती है,
फिर वो ही क्यों न उसे समझ पता है ,
और स्वयं की अवनति का कारन भी उसी को बताता है ..
जिन लोगो का इंतज़ार वो नज़रे बिछाये दिन भर करती है ,
वे ही खुद को उसके नजरो में आये आंसुओ का कारन बनाता है ..
सभी की इच्छाओ को पूरी करने की कोशिश करती है जो ,
उसकी इच्छाओ पर सदा ही वो ताले लगाता है ..
फिर भी मुस्कराता हुआ उसका चेहरा अपना हर दुःख , हर दर्द अपने भीतर
ही छुपता है...
कभी किसी से न कहता है !!!
कभी किसी से न कहता है !!!
By : vibha
By : vibha
By : vibha
बड़ी तदबीर से तेरे रिश्ते को निभाने
की चाहत की थी !
मुश्किल वक़्त में तेरी यादों को संजोने की
आदत की थी !
होंसला यदि झुका भी कभी ..
तो तेरी उम्मीदों पर खरा उतरने की हसरत की थी !
सिवाय तेरे साथ के बंधन के , कुछ न माँगा था मैंने
फिर क्यों तुने मुझसे ,
उस साथ की कीमत अदा करने की चाहत की थी !
शायद कमीं रह गयी ,मेरे कर्तव्यों में कहीं ,
जो तुने दिल से दूर जाने की इच्छा की थी !
माफ़ कर दे मुझे , पूरी न कर पाई मैं जो....
तुने मुझसे एक आशा की थी !
लगे है ,सिमट रहा है वक़्त
तेरे संग चलने का ...
और कहाँ मैंने ,हमेशा तेरा साथ देने की
आरज़ू की थी !
ईश्वर से मेरी गुजारिश है .....
पूरी कर दे हर वो दुआ
जो मैंने तेरे लिए महफूज़ की थी !!!!
By : vibha